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उपाध्याय पुष्कर मुनि थे जैनधर्म के युगदृष्टा

Ajay Kumar

उदयपुर(राजस्थानन)- रविवार को देवेन्द्र धाम में जैनाचार्य श्री देवेन्द्र मुनि शिक्षण एवं चिकित्सा शोध संस्थान,और श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के संयुक्त तत्वावधान में, साधना के शिखर पुरुष विश्वसंत उपाध्याय प्रवर गुरुदेव पुष्कर मुनि म.सा. की 103वीं जन्म जयंती को समारोह पूर्वक मनाते हुये उनका श्रद्धापूर्वक स्मुरण कि‍या गया। शुभारंभ मुंबई के धनसुख भाई-अश्विन भाई दोशी परिवार ने झण्डारोहण कर किया। जन्म जयंती पट्ट का अनावरण बसंतादेवी-हनुमतमल, वीरेन्द्र-रजनी, डा. वैभव-डा. अनिता, शुभम-अंकिता, निलय डांगी परिवार के हाथों होते ही वातावरण जय महावीर की जोरदार ध्वनि से गूंज उठा। महावीर दरबार के अनावरण कमलादेवी-स्व. देवीलाल, दिनेश, हेमंत, ललित, मीना चोरडिया, अमर दरबार का अनावरण लहरबाई-स्व. मोहनलाल, सुरेशकुमार, भगवतीलाल मोदी, देवेन्द्र दरबार का अनावरण हुक्मीचंद, रमेश, मुकेश, सुरेश, विनीत खोखावत और शिव दरबार का अनावरण दयाल सिंह, हेमंत कुमार छाजेड़ ने किया। इस मौके पर राष्ट्रसंत गणेशमुनि शास्त्री ने कहा कि‍, उपाध्याय पुष्कर मुनि ने समाज को नई दिशा प्रदान करने के लिए काफी संघर्ष करते हुये, पूरे विश्व में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश प्रसारित करते हुये जैनधर्म, दर्शन और चारित्र के प्रभाव की पताका पूरे विश्व में फैलाने का जो कार्य किया,आज हम सभी उनकी इस प्रदत्त प्रेरणाओं के ऋणी हैं। कहा यह उपाध्याय पुष्कर मुनि को वर्तमान और भविष्य की स्थितियों का ज्ञान था। यही वजह थी कि‍ युग की स्थिति का भांपते हुये, जैनधर्म को नई दिशा देने का प्रयास किया, और इसी वजह से वह युगदृष्टा कहलाये। यह उनके प्रयासों और दूर दृष्टि का परिणाम ही है कि जैनधर्म अनवरत रूप से प्रगति के सोपान की ओर अग्रसर है। वे महान व्यक्तित्व के धनी थे, और नवकार मंत्र के महान आराधक होने के अलावा, जैनधर्म के प्रत्येक पहलुओं को बारीकी से लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया। दिनेश मुनि ने पुष्कर मुनि के दिये गये उपदेशों का स्मरण करते हुये श्रावक समाज का आह्नान किया कि, वह उनके बताये सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। कहा कि उपाध्याय पुष्कर मुनि वैदिक और श्रमण संस्कृति के अनूठे सेतु थे। वह दीक्षा ग्रहण करने के बाद जैन साधना पद्धति पर बढ़ते चले गये। आगम की गाथाओं और नवकार महामंत्र का निनाद उनके व्यक्तित्व का एक आवश्यक सोपान बन गया था। वह संस्कृत के साथ- साथ वैदिक, बौद्ध, न्याय आदि दर्शनों गीता, उपनिषद् एवं आगम ग्रन्थों के प्रकाण्ड विद्वान और हिन्दी, प्राकृत, संस्कृत, पाली, राजस्थानी, गुजराती, मराठी, उर्दू समेत 9 भाषाओं के ज्ञाता होने के साथ- साथ साहित्य लेखन के धनी थे। आध्यत्मिक और नैतिक विषयों पर सवा सौ से अधिक पुस्तकों के साथ जैन कथा के 111 भागों, 300 विषय, 1000 से अधिक कहानियों का लेखन कर अपना नाम अमर कर दिया। प्रवर्तिनी महासती डा.चंदना ने कहा कि पुष्कर मुनि सहृदय की प्रतिमूर्ति थे, उनके उपदेश प्रेम, अहिंसा, सहिष्णुता पर आधारित होते थे। अपने प्रवचनों और व्यवहार के जरि‍ये जीवन के उच्चतम नैतिक, मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। इस दौरान श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि को उनकी सामाजिक सरोकारों से जुडी दीर्घकालीन देन और साहित्यिक उपलब्धियों के फलस्वरुप हिन्दी साहित्य संस्था इलाहाबाद की ओर से साहित्यश्री मानद की उपाधि से अलंकृत होने पर लोककलाविद् डा. महेन्द्र भानावत, प्राकृत भाषा एवं साहित्य अध्यक्षता डा. उदयचंद जैन, जैन विद्या और प्राकृत विभाग के पूर्व आचार्य हुक्मीचंद जैन ने दिनेश मुनि को प्रशस्ति पत्र भेंट किया। इस दौरान आचार्यश्री देवेंद्र मुनि ने लिखित सोना और सुगंध, फुलवारी और कल्पसूत्र ग्रंथ और उपाध्याय पुष्कर मुनि लिखित ओंकार और अनुचिंतन पुस्तक के साथ ही जैन कथाओं के भाग 2, 3, 4, 51, 56, 58 और 60 एवं 93 का लोकार्पण मुनिवृंद और अतिथियों ने किया। इस दौरान डा. पुष्पेंद्र मुनि ने बताया कि कल्पसूत्र में आचार्यश्री देवेंद्र मुनि ने शोधपूर्ण विवेचन और प्रामाणिक ढंग से नवीन उद्भावनाओं की व्याख्या की है। अलावा इन पुस्तकों के महासती पुष्पवती की लिखित पुस्तकों में किनारे-किनारे, महासती प्रभावती की लिखित जीवन की चमकती प्रभा का लोकार्पण भी किया गया। इस दौरान डा. द्वीपेन्द्र मुनि, विदुषी महासती केसर कुंवर, प्रवर्तिनी महासती डा. चंदना, विदुषी महासती सुधा कुंवर, पंजाब श्रमणी गौरव महासती ममता आदि का सान्निध्य श्रावक समाज को प्राप्त हुआ। मुख्य अतिथि लुधियाना के उद्योगपति लाला विजय कुमार जैन थे। अध्यक्षता दुबई प्रवासी उद्योगपति राजकुमार बोहरा ने की। समारोह में जिला प्रमुख मधु मेहता, सभापति रजनी डांगी, पूना, महावीर भवन सूरत के अध्यक्ष बसंतीलाल भोगर, औरंगाबाद के डा. चंपालाल देसरडा़, मुम्बई के अश्विन भाई दोशी,भुवाणा सरपंच सीमा चोरडिया और समाजरत्न किरणमल सावनसुखा समारोह गौरव के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत शॉल ओढा़कर और मार्ल्यापण कर किया गया। समारोह में श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के मंत्री वीरेंद्र डांगी, जैनाचार्य देवेन्द्र मुनि शिक्षण एवं चिकित्सा शोध संस्थान के मंत्री गणेशलाल गोखरू, कार्यक्रम के प्रचार संयोजक मांगीलाल जैन, कोषाध्यक्ष विजयसिंह छाजेड़, चिकित्सालय प्रभारी मानसिंह रांका, दिनेश चोरडिया समेत उदयपुर शहर, मेवाड़ और राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से आये श्रावक-श्राविकायें भी मौजूद रहे। संचालन डा. पुष्पेन्द्र मुनि श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के मंत्री वीरेंद्र डांगी ने किया। फोटो-समारोह में मंचासीन मुनिवृंद और मौजूद श्रावक-श्राविकायें। नोट-खबर देश/वि‍देश कालम में पढ़ी जा सकती है।

Report :- Ajay Kumar
Posted Date :- 21/11/2012
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