इटावा लाइव के समस्त पाठकों का इटावा लाइव परिवार हार्दिक स्वागत करता है।

एकलव्य स्टडी सर्किल ,मुख्य शाखा, प्रथम तल सियाराम मार्केट,भर्थना चौराहा ,इटावा , संपर्क सूत्र -9456629911,8449200060  | रिनेसाँ एकेडेमी,विकास कॉलोनी भाग-2 , कानपुर रोड, पक्का बाग, इटावा फोन नंबर -9456800140  | गरुकुल कंप्यूटर एजुकेशन एंड मैनेजमेंट ,इंफ्रोन्ट ऑफ़ रामलीला रोड ,गोविन्द नगर इटावा डायरेक्टर मोहम्मद शहीद अख्तर ,संपर्क सूत्र-9412190565  | रॉयल ऑक्सफ़ोर्ड इंटरनेशनल सीनियर सेकेण्डरी स्कूल एडमिशन ओपन क्लास पी.जी. से ट्वेल्थ पता रामलीला रोड इटावा ,संपर्क सूत्र-9927176666,9917166666  | सेंट मारिया स्कूल ,एडमिशन ओपन ,प्ले से इलेवेंथ ,पता बम्ब रोड ,पास लोहिया गैस गोदाम नयी मंडी इटावा,संपर्क सूत्र -८७५५५१९२१६,८७५५५१९२०४.  | ए-वन कम्पटीशन जोन फ्रेंड्स कॉलोनी भरथना चौराहा इटावा डायरेक्टर देवेंद्र सूर्यवंशी I  | विज्ञापन व समाचार प्रकाशन हेतु सम्पर्क करें- आशुतोष दुबे (संपादक) मो0- 9411871956 | e-mail :-newsashutosh10@gmail.com   | भरथना तहसील क्षेत्र अन्तर्गत समाचार प्रकाशन हेतु सम्पर्क करें- तनुज श्रीवास्तव (तहसील प्रतिनिधि) मो0- 9720063658  | 
साक्षात्‍कार

डिस्कबरी आॅफ इटावारू देवेश शास्त्री

Ajay Kumar

सर्वोत्कृष्ट जैनतीर्थ आसई
गंगा.यमुना के उद्गम ;गंगोत्री.यमुनोत्रीद्ध से लेकर संगम ;प्रयागद्ध तक फैले इष्टसाध्य इष्टापथ का केन्द्र इष्टिकापुरी ;इटावाद्ध जनपद में सूर्य तनया यमुना के उत्तरी तटस्थ दुर्गम करारों के मध्य विस्तृत राज्य था आसईए जिसे जैनतीर्थ आशानगरी नाम से जाना जाता था। यह जैनतीर्थ निश्चित रूप से अन्य तीर्थो से अति सर्वोत्कृष्ट रहा होगाए जिसका प्रमाण यदा.कदा उत्खनन से मात्र जैन तीर्थंकरों की प्रतिमायें मिलना है।आसई के निकटवर्ती ईश्वरीपुरा में मातादीन राजपूत के खेत में खुदाई में सैकड़ों साल पुरानी खंडित जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ मिली है जिनकी छोटी.बड़ी मिलाकर संख्या लगभग 400 से 500 तक है।  ईश्वरीपुरा निवासी वृजेश कुमार अपने खेत में ट्रेक्टर से जुताई कर रहे थे तभी उसे कुछ मूर्तियाँ खेत में दिखीए मूर्तियाँ निकलने की खबर से आसपास के गाँव के लोगों का आना शुरू हो गयाए गाँव वालों की मदद से खेत की खुदाई की गयी तो एक के बाद एक जैन धर्म की सैकड़ों साल पुरानी खंडित मुर्तिया खुदाई में निकलने लगी अनुमान है कि खेत में अभी और मूर्तियाँ हो सकती हैं यह तो और खुदाई से ही पता चल सकेगा। मूर्तियाँ सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं जो सफेद पत्थरए काला पत्थर व लाल पत्थर की हैं। कुछ मूर्तियों पर लिखावट भी है जिससे अनुमान है कि मूर्तियाँ हजारों वर्ष पुरानी हैं। ज्ञात हो कि हाल के वर्षों में निकटवर्ती ददोरा गांव में भी जैन तीर्थंकरों की प्रतिमायें निकली थी।जैन.आगम व इतिहास के अनुसार यह गांव ऐतिहासिक आसई ;आषानगरीद्ध राज्य में रहा हैए जहां 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी ने प्रवास किया थाए यह प्रवास वर्षायोग ;चातुर्मासद्ध था अथवा सामान्यए कुछ भी हो किन्तु ये सच है कि महावीर स्वामी यहां आये थे। लिहाजा यह पुण्य क्षेत्र है।जब हम जैन तीर्थंकरों से जुड़े तीर्थों का विश्लेषण करें तो पायेंगे कि अवध के सूर्यवंशी चार सम्राट प्रारंभिक चार तीर्थकर आदिनाथ ऋषभदेवए अजितनाथए अभिनन्दनए सुमतिनाथ अयोध्या में जन्में। जबकि तीन कुरुवंशी शांतिनाथए कुन्थुनाथए व अरहनाथ का जन्म स्थान हस्तिनापुर है। चन्द्रवंशी नेमिनाथ ब्रज के सीमान्त शोरिपुर ;वटेश्वरद्ध में हुए। सुपाश्र्वनाथ व पाश्र्वनाथ काशी ;वाराणसीद्ध में जन्में। सम्भवनाथ श्रावस्ती मेंए पद्मप्रभु कौशाम्बीमेंए चन्द्रप्रभु चंद्रपुरी मेंए पुष्पदन्त काकन्दी मेंए शीतलनाथ भद्रिकापुरी मेंए श्रेयान्सनाथ सिंहपुरी मेंए वासुपुज्य चम्पापुरी मंेए विमलनाथ पांचाल राज्य के काम्पिल्य मेंए अनन्तनाथ विनीता मेंए धर्मनाथ रत्नपुरी मेंए मल्लिनाथ मिथिला ;जनकपुरीद्ध में तथा महावीर स्वामी वैशाली क कुंडग्राम में जन्में। ये सभी जैनतीर्थ की श्रेणी में आते हैं। इसके साथ ही तीर्थंकरों की तपोभूमिए ज्ञानोदय भूमि व निर्वाण भूमि भी तीर्थ हैं।बिहार में सम्मेद शिखर में 24 में से 20 तीर्थंकर एवं असंख्य मुनि मोक्ष गए हैं। गया क्षेत्र के कुलुआ पहाड़ में 10वें तीर्थंकर शीतलनाथजी ने तप करके कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। पटना जिले के गुणावा में गौतम स्वामी मोक्ष गए हैं। पावापुरी महावीर स्वामी कार्तिक कृष्ण 30 ;दीपावलीद्ध को मोक्ष गए हैं। राजगृहीमें विपुलाचलए सोनागिरिए रत्नागिरिए उदयगिरिए वैभारगिरि ये पंच पहाड़ियाँ प्रसिद्ध हैं। इन पर 23 तीर्थंकरों का समवशरण आया था। चम्पापुर में वासूपूज्य मोक्ष गए हैं। इनके अलावा खण्डगिरिए उड़ीसा के खण्डगिरि और उदयगिरि नाम की दो पहाड़ियाँ हैं। मध्य प्रदेश में श्रमणाचल पर्वत ;सोनागिरिद्धए द्रोणगिरिए नैनागिरिए मुक्तागिरिए सिद्धवरकूटए चूलगिरिए रामटेकए खनियाधानाए चंद्रगिरी ;डूंगरगढ़द्धए अहिक्षेत्रए महावीरजीए चाँदखेड़ीए पद्मपुरीए गुजरात में गिरिनारए शत्रुंजयए पावागढ़ए माँगीतुंगीए गजपन्थाए कुंथलगिरिए कर्कलाए श्रवणबेलगोला आदि तमाम तीर्थस्थल है।  इन सब तीर्थों के मुकाबले आसई ;आशानगरीद्ध को कम नहीं आंका जा सकता क्योंकि  24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी ने प्रवास किया थाए यह प्रवास वर्षायोग ;चातुर्मासद्ध था अथवा सामान्यए कुछ भी हो किन्तु ये सच है कि महावीर स्वामी यहां आये थे। जहां महावीर स्वामी ने प्रवास किया था वह भूमि उनकी तेजस्विता से इतनी प्रल्लावित थी कि जहां आने वालों के मनोभाव स्वतः जिनस्तेज से प्रभावित हो जाते थे। 
अन्ततः वहां अति विकसित तीर्थ स्थापित हुआ। आसई के राजघराने की कई पीढ़ियों ने समूचे राज्य को जैनतीर्थ के रूप में विकसित किया थाए दक्षिण भारत के पद्मनाभ और तिरुपति तीर्थ की शैली में अनगिनत जैनालय बनाये गयेए जिनमें विविध शैलियों में तीर्थकरों की करोड़ों प्रतिमायें रहीं होंगीं। साथ ही अकूत सम्पदा भी थी। जिसे लूटने के उद्देश्य से मुगल आक्रान्ता गजनवी व मुहम्मद गौरी ने आसई पर क्रमिक आक्रमण कर जैनतीर्थ आसई को जमीदोज कर दिया था। जिसके प्रमाण इसक्षेत्र में खनन के दौरान मिल रही जैन मूर्तियों से निरंतर मिलते रहे हैं।विगत वर्ष जैनमुनि प्रमुख सागर महाराज जब अपनी जन्मभूमि इटावा आये तो मैंने अपने पूर्व छात्र पर राग.द्वेषादि अन्तश्शत्रु के प्रहार को अनुभव करते हुए शिक्षक धर्म निभाते हुए सलाह दी थी कि ष्ष्आप को आचार्य.उपाध्याय के सोपान पार करते हुए परमेष्टि के लक्ष्य तक जाना हैए तो आसई के जंगल में कुछ समय अन्तर्मुखी होकर महावीर स्वामी के जिनस्तेज से लाभान्वित हों।ष्ष् 
महावीर जयन्ती आने वाली हैए निश्चित रूप से जैन समाज महावीर जन्मोत्सव में आसई के जंगल में मनाये और फिर जैनतीर्थ आशानगरी को पुनः विकसित करने का अभियान चलाये तो शासन.प्रशासन व समूचा जनपद उत्साह से सहभागी हो सकता है।
. देवेश शास्त्रीए इटावा

Report :- Ajay Kumar
Posted Date :- 02-04-2016
साक्षात्‍कार
Video Gallery
Photo Gallery

Portal Owned, Maintained and Updated by : Etawah Live Team || Designed, Developed and Hosted by : http://portals.news/