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मुलायम सिंह यादव के 76 वें दिवस पर खादिम ने कहा डा0 लोहिया ने कभी जन्‍म दिन नही मनाया

Desk

धरती पुत्र सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के 76 वें जन्म दिवस पर कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ने मुबारकबाद देते हुए कहा कि खादिम चाहता है कि कुदरत मुलायम सिंह यादव को लम्बी उमर दे और वे स्वस्थ्य रहें। लेकिन जिस तरह से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के 76वें जन्म दिवस के अवसर पर सरकारी तामझाम का ढिंढोरा पीटकर जनता की गाढ़ी कमाई का जो करोड़ों रुपया फिजूल खर्ची करके सैफई की सरजमीं पर राजनैतिक शक्ति का भौंड़ा प्रदर्शन करके तमाशा किया गया है, उसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता। पता नहीं चापलूसी और चाटुकारिता का विरोध करने वाले मुलायम सिंह यादव अपने 76 वें जन्म दिवस पर इस प्रकार की भौड़ी नौटंकी करवा कर देश की राजनीति में क्या हासिल करना चाहते हैं? पिछले साल की ही तो बात है कि जब मुसलमानों की पीठ में छुरा भौंकने वाले मफाद परस्त बयानवीर खुदगर्ज आजम खां ने सपा मुखिया के 75 वें जन्म दिवस के अवसर पर अपने रामपुर में गुलामी की प्रतीक विक्टोरिया बग्घी में मुलायम सिंह यादव को बैठाकर उनकी जिस तरीके से जग हसंाई कराई थी, उससे निश्चित रूप से समाजवाद के पुरोधा डा0 राम मनोहर लोहिया की आत्मा जरूर आहत हुई होगी। पता नहीं मुलायम सिंह इस उम्र के पायेदान पर पहुंचकर इस प्रकार की भौंड़ी नौटंकी का प्रदर्शन करके कौन सा कीर्तिमान हासिल करना चाहते हैं? क्या मुलायम सिंह यादव के आदर्श डा0 राम मनोहर लोहिया ने कभी भी अपने जन्म दिवस पर इस प्रकार का भौंड़ा प्रदर्शन नहीं किया है, जो मुलायम सिंह यादव अपनी इस ढलती उम्र में कर रहे हैं। पता नहीं मुलायम सिंह यादव को इस समय अपने जन्म दिवस मनाने का शौक किसकी प्रेरणा से चर्राया हुआ है। मुलायम तो किसान पुत्र के साथ अपने आपको डा0 लोहिया का शागिर्द और खाटी समाजवादी बताते हैं। भला फिर डा0 लोहिया के आदर्श और सिद्धांतों की हत्या क्यों? क्या मुलायम सिंह जी के पास सलाहकारों का टोटा पड़ गया है, जो वह इस बाली उम्र में बचकानी हरकत करने के लिये आमादा हैं। मुलायम सिंह के जन्म दिवस पर सरकारी खजाने की जो करोड़ों रुपये की फिजूल खर्ची हुई है, उसकी चारों ओर खिल्ली उड़ना स्वाभाविक है, उसके ऊपर तीर का तुक्का यह है कि सपाईयां को इस बात के लिये प्रेरित और मजबूर किया जा रहा है कि वह नेता जी यानी कि मुलायम सिंह यादव का 76 वां जन्म दिवस ब्लाक स्तर पर बड़ी धूमधाम से मनायें? ऐसी कौन सी मुसीबत या आसमान टूट पड़ा है, जिसके लिये सपाईयों को अनावश्यक रूप से प्रेरित किया गया। जन्म दिवस पर दुनिया भर के तामझाम व नाच रंग करना यह तो रईसों, राजा, रजवाड़ों एवं धन्ना सेठों के चोचले हुआ करते हैं। भला समाजवाद के झण्डाबरदार मुलायम सिंह यादव का इस प्रकार के चोचलों से क्या लेना देना? पता नहीं कौन सी ऐसी चापलूसों की मण्डली का वर्चस्व सपा मुखिया के इर्द गिर्द जमा हो गयी है, जो मुलायम सिंह जैसे धरती पुत्र को न तो कुछ अच्छा करने देता है और न ही कुछ अच्छा समझने देता है। यदि ऐसा न होता तो मुलायम सिंह यादव जैसे तेज तर्रार नेता हर कदम पर सियासी मात नहीं खाते और न ही सूखे मंे रपटते? यही कारण है कि अब यह नारे नहीं लगते हंै कि ‘‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’’। कैसी विडम्बना है कि अब मुलायम सिंह जी को अपनी राजनीति को चमकाने एवं खोई हुई शक्ति को प्राप्त करने के लिये नचैयों और गवैयों का सहारा लेने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। अब मुलायम सिंह यादव के जन्म दिन पर बौद्धिक लोगों के प्रवचन नहीं होते बल्कि संगीत सम्राट ए0आर0 रहमान की मधुर धुनों पर मुम्बई की हसीनाओं के जलवों के साथ सपाई थिरकते हुए नजर आते हैं। यहां पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के उन शब्दों का उल्लेख करना आवश्यक है, जो उन्होंने अपने 76 वें जन्म दिवस के आयोजन से 36 घण्टे पहले लखनऊ में अपनी पार्टी के युवा संगठनांे को सम्बोधित करते हुये कहे। मुलायम सिंह यादव ने गरजते हुये फरमाया और नौजवानों को समझाया कि राजनीति में विनम्रता और ईमानदारी की जरूरत है। आलोचना करने वाला सही अर्थां में दोस्त होता है। चापलूस तो सिर्फ धोखा देते हैं। मुलायम सिंह जी ने महागठबन्धन से नाता तोड़ने का राज भी खोला और कहा कि कांग्रेस को गठबन्धन में शामिल कर उनके साथ धोखा किया गया और इसी के चलते हुये उन्हें अलग होना पड़ा। मुलायम सिंह जी की यह बातें अपने आप में सिर्फ मियां मिट्ठू बनने के अलावा कुछ नहीं हैं। पता नहीं खादिम अब्बास के यह विचार नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव व उनकी पलटन को कितने रास आते हैं कि मुलायम सिंह यादव जी ने महागठबन्धन से अपना नाता तोड़कर एक तरह से अपनी राजनीति का कबाड़ा ही किया है। आमजन की धारणा है कि ऐसा सब कुछ मुलायम सिंह ने भाजपा को लाभ पहुंचाने एवं सी0बी0आई0 के डर से किया है। सच्चाई कुछ भी हो लेकिन राजनीति में किन्तु और परन्तु दोनों साथ-साथ चलते हैं। मुलायम सिंह जी से जो सियासी भूल हुई है, इसकी भरपाई वह कैसे करेंगे, यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन यह सच है कि दूसरे लोगों को अपने चरखा दांव से चित करने वाले मुलायम सिंह यादव आज खुद अपने चरखा दांव से चित्त हो गये हैं। मुलायम सिंह जी आज भी भूल कर रहे हैं, जो सच्चाई को अन्तरआत्मा से स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सच तो यह है कि देश भर के सारे समाजवादियों ने महागठबन्धन करके मुलायम सिंह यादव को अपना नेता मान लिया था। बिहार का चुनाव मुलायम सिंह के नेतृत्व मे ही लड़ा जाना था, सो मुलायम सिंह जी ने यह सुनहरा मौका अपने हाथ से गवां दिया। अब इधर उधर की बातें करने से क्या लाभ? शायर की यह पंक्तियां मुलायम के ऊपर सटीक बैठती हैं कि ‘‘जो सुनहरा अवसर गवां देगा, जमाना उसे जिन्दगी भर सजा देगा’’। मुलायम सिंह जी को अपनी खिसियाहट का ठीकरा किसी दूसरे के ऊपर नहीं फोड़ना चाहिये, बल्कि आत्म चिंतन करना चाहिये। यदि बिहार के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की जमानतें जब्त हुई हैं, इसका कोई दूसरा नहीं बल्कि मुलायम सिंह यादव स्वंय जिम्मेदार हैं। यह बात जितनी जल्दी मुलायम सिंह की समझ में आ जाये, यह उनकी राजनीति के लिये उतना ही अच्छा है। आज मुलायम सिंह यादव की स्थिति राजनति में सांप-छछूंदर सी बनकर रह गयी है। सपा मुखिया जब महागठबन्धन के लीडर बनाये गये थे, तब वह महानायक थे, चारों ओर उनका डंका बज रहा था। लेकिन जैसे ही उन्होंने महागठबन्धन से बिहार में नाता तोड़ा वैसे ही मुलायम सिंह यादव देश की धर्मनिरपेक्ष जनता के लिये महाखलनायक बनकर रह गये हैं। यदि मुलायम सिंह यादव ने महागठबन्धन से नाता न तोड़ा होता और यही सफलता उनके नेतृत्व में बिहार चुनाव में मिली होती तो, निश्चित रूप से मुलायम सिंह यादव का राजनीति मेें सबसे ऊंचा कद होता और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, संघ परिवार व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जैसे लोगों का कद बहुत बौना हो जाता, चारों ओर मुलायम सिंह यादव के वैभव की ही चर्चा हो रही होती और हर टी0वी0 चैनलों पर सिर्फ मुलायम सिंह यादव ही नजर आते। हालात ऐसे होते कि लालू यादव और नीतीश कुमार की कहीं भी कोई विशेष चर्चा नहीं होती। सारा जीत का श्रेय मुलायम सिंह यादव को जाता। वायुमण्डल में सिर्फ एक ही नाम गूंजता, वह नाम था मुलायम सिंह यादव का। महागठबन्धन से नाता तोड़ने की सजा मुलायम को बिहार की जनता ने दे दी है। नेता जी, यानी कि मुलायम सिंह यादव की आज स्थिति यह हो गयी है कि न खुदा ही मिला न बिसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे। कैसी बिडम्बना है कि आज सपाई नेता अपने मुखिया मुलायम सिंह यादव के 76 वें जन्म दिवस मनाने की गुहार सपाईयों से करते हुए घूम रहे हैं। अगर मुलायम सिंह ने महागठबन्धन से नाता तोड़ने की भूल न की होती तो सारा देश मुलायम सिंह यादव का जन्म दिवस नाच-नाच कर गांव, गली, कूंचों में झूम-झूम कर अपने आप मना रहा होता। इसके लिये मुलायम को अपने पैतृक गांव सैफई में तम्बू, बम्बू व टंडीरा अपने जन्म दिवस मनाने के लिये नहीं गाड़ना पड़ता। आज देश में हर तरफ मुलायम सिंह यादव की जय-जयकार हो रही होती। आज मुलायम सिंह यादव एवं उनकी मण्डली चाहे जितना सरकारी तामझाम फैलाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करके 76वां जन्म दिवस मना लेे, इसमें किसी भी प्रकार की ताजगी नहीं आने वाली। जब कोई व्यक्ति हीरों से जीरो बन जाता है, तब उसकी मार्केट वैल्यू भी नहीं रह जाती। मुलायम सिंह राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं, उन्हें बचकाना राजनीति से तौबा करनी चाहिये। उनके निशाने पर कांग्रेस नहीं, संघ परिवार, भाजपा व नरेन्द्र मोदी होना चाहिये। हो सकता है कि ऐसा करने से उनकी उजड़ी बगिया में फिर से बहार आ जाये। मुलायम सिंह यादव ने महागठबन्धन से नाता तोड़कर तथा नरेन्द्र मोदी से दुरभिसंधि करके जो आत्मघाती कदम उठाया है, उसका खामियाजा 2017 के उ0प्र0 में होने वाले विधानसभा के चुनाव में उनके मुख्यमन्त्री पुत्र अखिलेश यादव को उठाना पड़ सकता है। इसलिये उन्हें चापलूसों और स्वार्थियों की मण्डली से अपने आपको सिर्फ बचाना ही नहीं होगा बल्कि कांग्रेस की आलोचना से भी बचना होगा। सब जानते हैं कि 1991 में राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह को हटाकर चन्द्र शेखर को प्रधानमन्त्री और मुलायम सिंह यादव को मुख्यमन्त्री, राजीव गांधी और कांग्रेस ने ही बनाये रखा था। इसलिये मुलायम सिंह यादव को अपनी इस बेजा और बचकानी हरकत से बाज आना चाहिये कि वह गुड़ खायें ओर गुलगुलों से परहेज करके जनता को मूर्ख बनायें। जबकि सच्चाई यह है कि मुलायम सिंह यादव उ0प्र0 के तीन बार मुख्यमन्त्री व केन्द्र में रक्षामन्त्री बने, इसमें भी परोक्ष रूप से कांग्रेस का समर्थन मुलायम सिंह यादव को रहा है। मुलायम सिंह यादव को दीवार पर लिखी इबारत को समय रहते पढ़ लेना चाहिये वरना उनका भी वही हश्र होगा, ‘‘जो शाख टूटती है, लचकती जरूर है, बुझने से पहले शम्मां भड़कती जरूर है’’ मुलायम सिंह जी अपना जन्म दिवस चाहे जितने तामझाम के साथ मना लें, दूसरी बार सत्ता की वापसी उनकी ऐसी चोचलों से नहीं आने वाली। सत्ता दोबारा प्राप्त करने के लिये मुलायम सिंह यादव के साथ अखिलेश यादव केा भी आत्मचिंतन और मंथन करना पड़ेगा। तब कहीं बात मुडेर चढ़ेगी। वैसे भी महागठबन्धन से नाता तोड़ने का खतरा मुलायम सिंह यादव की राजनीति के ऊपर हमेशा मंडराता रहेगा। इसे संयोग कहें या आत्मबल की कमी कि नीतीश कुमार की ताजपोशी के समय मुलायम सिंह के कुनबे का कोई भी व्यक्ति नीतीश कुमार के मुख्यमन्त्री बनने के समारोह में कहीं भी नहीं दिखाई दिया। लगता है कि महागठबन्धन से नाता तोड़ने के बाद मुलायम सिंह यादव में इतना नैतिक बल और आत्म विश्वास नहीं रहा है कि वह देश भर से पहुंचे उन तमाम नेताओं से आंखे मिला सकेें, जिन्होंने महागठबन्धन की सरकार बनवाने में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था। आने वाले दिन मुलायम सिंह यादव और उनकी सपा के लिये जोखिम भरे हैं, इसलिये उन्हें जन्म दिन जैसे शगूफों से दूर रहकर फूंक-फूंकर कदम रखने होंगे। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को अपने 76 वें जन्म दिवस पर यह बात विशेष रूप से याद रखनी होगी कि उनके पुत्र अखिलेश यादव की 2012 में जो मुख्यमन्त्री पद पर ताजपोशी हुई है, उसमें मुस्लिम समाज का बहुत बड़ा योगदान है। मुलायम सिंह जी आपने मुसलमानों से वायदा तथा अपने घोषणा पत्र में उल्लेख किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो वह मुस्लिम समाज को 18 प्रतिशत आरक्षण देगे, जिन बेगुनाह मुसलमानों को आतंकवादी बताकर गलत रूप से जेल में बंद किया गया, उन्हें रिहा किया जायेगा। उर्दू को प्रदेश की दूसरी भाषा का दर्जा दिया जायेगा आदि तमाम बातें हैं, जिसकी घोषणा मुलायम सिंह ने सार्वजनिक मंचों के साथ अपने घोषणा पत्र में की थी, लेकिन अखिलेश यादव को मुख्यमन्त्री बने लगभग 4 वर्ष होने को आये हैं, उपरोक्त वायदों में से एक भी वायदा मुलायम व अखिलेश यादव ने पूरा नहीं किया है। आने वाले समय में इसका नुकसान भी मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव को उठाना पड़ सकता है। जहां तक उर्दू भाषा का सवाल है, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने निर्णय में कहा है कि उ0प्र0 में उर्दू भाषा को अधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जाये। काश! मुलायम सिंह यादव अपने 76 वें जन्म दिवस पर अपने द्वारा किये गये उपरोक्त वायदों को अमली जामां पहनाते तो उनका 76 वां जन्म दिवस सार्थक हो जाता। ................................................खादिम अब्बास

Report :- Desk
Posted Date :- 27-11-2015
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