इटावा लाइव के समस्त पाठकों का इटावा लाइव परिवार हार्दिक स्वागत करता है।

एकलव्य स्टडी सर्किल ,मुख्य शाखा, प्रथम तल सियाराम मार्केट,भर्थना चौराहा ,इटावा , संपर्क सूत्र -9456629911,8449200060  | रिनेसाँ एकेडेमी,विकास कॉलोनी भाग-2 , कानपुर रोड, पक्का बाग, इटावा फोन नंबर -9456800140  | गरुकुल कंप्यूटर एजुकेशन एंड मैनेजमेंट ,इंफ्रोन्ट ऑफ़ रामलीला रोड ,गोविन्द नगर इटावा डायरेक्टर मोहम्मद शहीद अख्तर ,संपर्क सूत्र-9412190565  | रॉयल ऑक्सफ़ोर्ड इंटरनेशनल सीनियर सेकेण्डरी स्कूल एडमिशन ओपन क्लास पी.जी. से ट्वेल्थ पता रामलीला रोड इटावा ,संपर्क सूत्र-9927176666,9917166666  | सेंट मारिया स्कूल ,एडमिशन ओपन ,प्ले से इलेवेंथ ,पता बम्ब रोड ,पास लोहिया गैस गोदाम नयी मंडी इटावा,संपर्क सूत्र -८७५५५१९२१६,८७५५५१९२०४.  | ए-वन कम्पटीशन जोन फ्रेंड्स कॉलोनी भरथना चौराहा इटावा डायरेक्टर देवेंद्र सूर्यवंशी I  | विज्ञापन व समाचार प्रकाशन हेतु सम्पर्क करें- आशुतोष दुबे (संपादक) मो0- 9411871956 | e-mail :-newsashutosh10@gmail.com   | भरथना तहसील क्षेत्र अन्तर्गत समाचार प्रकाशन हेतु सम्पर्क करें- तनुज श्रीवास्तव (तहसील प्रतिनिधि) मो0- 9720063658  | 
आपकी बात

इटावा महोत्सव का सैफई महोत्सव ने निकाला कचूमर ...खादिम अब्बास

Desk

सैंफई परिवार में कोई तो है, जिसने सच को स्वीकाराशिवपाल सिंह यादव ने इटावा प्रदर्शनी समिति को दिखाया आ इटावा। इटावा प्रदर्शनी कई सालों से अपनी बदनसीबी पर आंसू बहा रही है। कारण है कि स्व0 रणवीर सिंह यादव की स्मृति में लगने वाले सैफई महोत्सव ने इटावा महोत्सव की सारी खुशियां लील ली हैं। इसका आभास सपा के शीर्ष नेतृत्व को हो या न हो जनपद इटावा की जनता को इसकी असहनीय पीड़ा का एहसास जरूर है। वह समय-समय पर अपनी इस पीड़ा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने में कोई संकोच नहीं करती। जनपद की जनता जहां एक ओर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व उनके मुख्यमन्त्री पुत्र अखिलेश यादव की इस बात को लेकर मन की गहराईयों से प्रशंसा करती है कि इन दोनों पिता और पुत्र ने मिलकर प्रदर्शनी पण्डाल को भव्य रूप प्रदान करके जनपदवासियों पर एहसान किया है, वहीं दूसरी ओर जनता मुलायम व अखिलेश यादव की इस बात को लेकर सार्वजनिक रूप् से आलोचना, निन्दा तथा भत्र्सना करती है कि सपा के इन शीर्नताओं ने इटावा प्रदर्शनी की मांग उजाड़ कर उसे रांड बना दिया है? जिस दिन से स्व0 रणवीर सिंह यादव की स्मृति में सैफई महोत्सव का आयोजन किया गया है, उसी दिन से इटावा नुमाइश के दुर्दिन शुरू हो गये हैं, नतीजा यह निकला कि इटावा महोत्सव अपनी बदनसीबी पर आंसू बहाता हुआ नजर आता है। काश! सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व उनके होनहार मुख्यमन्त्री पुत्र अखिलेश यादव ने इटावा नुमाइश की तबाही और बर्बादी पर कभी नजर डाली होती और वह इस उजड़ी हुई प्रदर्शनी के ऊपर कभी गम्भीरता से विचार करते कि सैफई महोत्सव ने इटावा प्रदर्शनी को जवानी की चैखट पर पैर रखने से पहले ही एक बुढि़या की स्थिति में जाने या अनजाने में पहुंचा दिया है। मुलायम सिंह जी या अखिलेश यादव सरकारी खजाने का मुंह खोलकर सैफई महोत्सव के लिये जितना चाहें उतना धन लुटा दें, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जिस तरीके से इटावा महोत्सव एंव प्रदर्शनी पर जवानी से पहले बुढ़ापा आ जाता है, उसे किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता। सैफई महोत्सव को चमकाने एवं उसको बुलन्दियों पर पहुंचाने के लिये हर साल सत्ता की हनक व धमक से सपा का शीर्ष नेतृत्व अपनी मनमानी द्वारा इटावा प्रदर्शनी का कबाड़ा करता है, उसे तो किसी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा हर साल जो भौंड़ा प्रदर्शन करके इटावा महोत्सव एवं प्रदर्शनी का जिस प्रकार से कचूमर निकाला जाता है, उससे मुलायम व अखिलेश यादव की सार्वजनिक रूप् से सिर्फ भद ही पिटती है। सैफई महोत्सव को चमकाने व दमकाने के लिये जिस प्रकार से इटावा प्रदर्शनी के साथ छेड़छाड़ व मनमानी की जाती है, उससे इटावा महोत्सव का स्वरूप ही बिगड़ता जा रहा है। मसलन जो नुमाइश सारे देश में अपनी भव्यता के लिये मशहूर थी, उसकी रौनक दिनों दिन सिकुड़ती जा रही है, उसका मूल कारण है इटावा महोत्सव के समय और दिनों में कटौती करना। अब इटावा प्रदर्शनी के नसीब का फैसला चुनी गई प्रदर्शनी कार्यकारणी के सदस्य नहीं करते बल्कि सैफई वाले अपनी सुख सुविधा के अनुसार उसके दिन व समय निश्चित करते हैं कि इटावा महोत्सव का कब शुभारम्भ होगा तथा कब समापन होगा। उसका कारण यह है कि इटावा प्रदर्शनी समिति के पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी होते हैं, वह वो ही काम करेंगे, जो उनके सरकारी आका चाहेंगे। इस साल तो हद हो गई कि इटावा महोत्सव एवं प्रदर्शनी का उदघाटन 29 नवम्बर 2015 को हुआ और उसका समापन विधिवत रूप से 24 दिसम्बर को कर दिया गया। क्योंकि 26 दिसम्बर को सैफई महोत्सव का उदघाटन जो होना था। क्या सैफई परिवार की यह कार्यशैली इटावा जनपदवासियों के साथ अन्याय नहीं है। इस भौड़ी कार्यशैली पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को जरूर ध्यान देना चाहिये। यदि सैफई महोत्सव या इटावा महोत्सव के बीच में महीने या पन्द्रह दिन का फासला होगा, तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा? इससे तो यही संदेश जा रहा है कि सैफई वाले जानबूझकर इटावा प्रदर्शनी को तबाह और बर्बाद करना चाहते हैं, तभी इस प्रकार की मनमानी जानबूझकर की जा रही है। सब जानते हैं कि इटावा प्रदर्शनी एवं पशुमेला का शुभारम्भ बटेश्वर मेला (जिला आगरा) के पश्चात शुरू होता है। जब परम्पराओं के साथ मनमानी या छेड़छाड़ की जाती है, तो निश्चित रूप से उन मान्यताओं को ग्रहण लगता है, फिर उसके सुफल व परिणाम भी प्रभावित होते हैं और सारा ढांचा चरमरा कर रह जाता है। जिससे उसकी सफलता पर भी चोंट पहुंचती है। यही कारण है कि इटावा प्रदर्शनी अपनी दयनीय स्थिति में पहुंच गयी है। उसका वैभव दिनों दिन घट रहा है। इटावा महोत्सव की ख्याति भी प्रभावित हो रही है। और उस पर एक प्रकार का ग्रहण सा लग गया है। सपा मुखिया को यह भलीभांति समझना चाहिये कि उनकी स्वंय की पहचान इटावा से है न कि सैफई से? नेता जी अपने व आपके पुत्र अखिलेश यादव ने प्रदर्शनी का भव्य पण्डाल बनाकर इटावा जनपदवासियों के ऊपर बड़ा उपकार किया है। इटावा प्रदर्शनी की गरिमा व भव्यता को बनाये रखने की जिम्मेदारी भी मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की ही बनती है। वह कोई भी ऐसा काम नहीं करें, या किसी को करने दें, जिससे जनपद व देशवासी उनकी ओर उंगली उठा सकें। यहां पर सैफई परिवार के शिवपाल सिंह यादव जो कि प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग के अलावा कई विभागों के कैबिनेट मन्त्री हैं, उन्होंने विगत दिवस एक प्रेस वार्ता में इटावा प्रदर्शनी के गिरते स्तर पर यह कहकर चिंता व्यक्त की, कि इटावा प्रदर्शनी की अपनी महत्वता और गरिमा थी कि हम सैफई से साइकिल पर चलकर इटावा प्रदर्शनी आते थे, यहां के कार्यक्रम इसकी भव्यता और गरिमा निराली थी, अब तो इटावा प्रदर्शनी में कोई रौनक ही नहीं है। यहां पण्डाल में होने वाले कार्यक्रमों का स्तर भी अब कोई खास नहीं रह गया है। इस पर सभी को ध्यान देना चाहिये। खासकर नुमाइश कमेटी की जिम्मेदारी बनती है कि वह नुमाइश का स्तर सुधारने के साथ यहां आने वाले व्यापारियों के सम्मान की भी सुरक्षा करें तथा उनका उत्पीड़न न होने दें। शिवपाल सिंह यादव ने यह सारी बातें इटावा नुमाइश की दुर्दिशा देखकर कीं,उसका मूल कारण यह है कि वह अक्सर नुमाईश पण्डाल में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, उन्हें धरातल की जानकारी हैं, इसलिये उन्होंने अपने मन की व्यथा सार्वजनिक की। आखिर सैफई परिवार में कोई तो है, जिसने सार्वजनिक रूप से सच को स्वीकारा। हमारे मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव भी अजीबो-गरीब हैं। वह सैफई के साथ इटावा भी आते हैं और लायन सफारी का भ्रमण करके सीधे हैलीकाॅप्टर पर बैठकर फुर्र हो जाते हैं। उन्हें मुख्यमन्त्री बने लगभग चार साल होने को आये हैं लेकिन इस पट्ठे ने आज तक नुमाइश पण्डाल में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में आने की जहमत नहीं उठाई। यदि अखिलेश यादव ने नुमाइश का भ्रमण किया होता या किसी कार्यक्रम में हिस्सेदारी की होती, तो निश्चित रूप् से वह अपनी बदनसीबी पर आंसू बहा रही नुमाइश की दुर्दशा से दो चार होकर यह जरूर महसूस करते कि सैफई महोत्सव का यह अर्थ और मतलब कतई नहीं है कि इटावा प्रदर्शनी को तबाह और बर्बाद कर दिया जाये। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव आप धरती पुत्र हैं। आपको याद रखना चाहिये कि किसी के घर को आग लगाकर हाथ नहीं तापे जाते और न ही किसी को हरी भरी बगिया को उजाड़ कर कोई शोहरत हासिल की जा सकती? यह बात भी अपने आप में सत्य है कि किसी का दीपक बुझाकर अपने घर में उजाला या प्रकाश करने वाला व्यक्ति कभी भी सरसब्ज नहीं हो सकता है। शिखर पर सदा वही व्यक्ति चमक सकता है, जिसका दिल व सोच विशाल हो। सैफई महोत्सव की सार्थकता तभी मानी जायेगी। जब इटावा महोत्सव एवं प्रदर्शनी में चार चांद लगें। मुलायम सिंह यादव जी आपका इटावा प्रदर्शनी से गहरा रिश्ता है। इसलिये यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है कि आप इसकी गरिमा को गिरने न दें, तभी आप सच्चे समाजवादी माने जायेंगे। छात्र जीवन से लेकर आज तक आपने इटावा दंगल में अपने मलयुद्ध के साथ सियासी जौहर दिखाये हैं। इटावा महोत्सव की भव्यता के लिये आपको अपने वह तेबर दिखाना चाहिये, जिसके लिये आप जाने जाते हैं। मुलायम सिंह यादव आपको बताते चलें कि विगत दिवस इटावा प्रदर्शनी पण्डाल में स्वतन्त्रता संग्राम सैनानी सम्मेलन था, जिसमें लेखक खादिम अब्बास भी उपस्थित था। इसमें उत्तर प्रदेश भर के स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों ने भाग लिया। इसमें कुछ की आयु लगभग सौ साल के करीब थी। उनका कहना था कि जब मैंने इटावा की सरजमीं पर पैर रखा तो मुझे इस बात की बेहद खुशी थी कि मैं सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव एवं मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव के गृह जनपद में सम्मेलन में भाग लेने आया हूं। मुझे इस बात का भी गर्व था, कि मैं सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के गृह जनपद में आया हूं। यहां हम स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों का अभूतपूर्व स्वागत होगा, लेकिन इटावा नुमाइश पण्डाल के मंच पर आकर यह महसूस हुआ कि यह हम लोगों का दिवास्वप्न और भ्रम था जो चूर-चूर हो गया। यहां मंच पर तो कार्यक्रम के संयोजक तक नहीं है। इससे बड़ा अपमान हम स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों का और क्या हो सकता? मंच पर सैनानियों को बताया गया कि प्रदर्शनी के अध्यक्ष जिलाधिकारी व जनरल सेक्रेटरी एसडीएम सदर सैफई महोत्सव की तैयारी में व्यस्त हैं, इसलिये वह पण्डाल मंच में आने में असमर्थ हैं, फिर क्या था, इतना वाक्य सुनकर स्वतन्त्रता सैनानी फट पड़े और उन्होंने मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव सहित प्रदर्शनी के जिम्मेदार अधिकारियों की जमकर खबर ली और यहां तक कह गये कि जो व्यक्ति दूसरों का घर जलाकर अपने घर के लिये उजाला करें, उसे तो कुदरत तक क्षमा नहीं करती है। मुलायम की नगरी में जो हम स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों का निरादर हुआ है वह अक्षम है। सैनानी कार्यक्रम के अंत तक अपने अपने तरीके से शासन और प्रशासन के हर जिम्मेदार को खरी खोटी सुनाकर अपने मन की भड़ास निकालते रहे और लौट फेर के बस एक ही बात कहते रहे कि हमें नहीं मालूम था कि मुलायम व अखिलेश के घर में हम लोगों का इतना भयंकर और असहनीय अपमान होगा। मुलायम सिंह जी आप को इस बात का ज्ञान होना चाहिये कि धन व सत्ता चलायमान होती है न जाने कितने आये और चले गये। जब लोगों की राजशाही नहीं रही तो फिर लोकतान्त्रिक व्यवस्था में शासन और सत्ता की कोई उम्र नहीं होती, न जाने कब इसकी सांसे रुक जायें? इसका मूल्यांकन किसी दूसरे को नहीं सिर्फ मुलायम सिंह जी आपको स्वंय करना चाहिये? क्या आप सैफई को सोने की लंका बनाकर अमर हो सकते हैं? जब-जब भी इटावा महोत्सव एवं प्रदर्शनी के शुभारम्भ होने का समय आता है, तब सैफई महोत्सव का भय अकारण लोगों के मन और मस्तिष्क में दौड़ जाता है, जनपदवासियों के जहन में एक ही बात कौंधती है कि सैफई महोत्सव की चकाचैंध को बरकरार रखने के लिये एक बार इटावा प्रदर्शनी की गरदन मरोड़ी जायेगी। क्या यह शंका मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की राजनीति के शुभ हैं। इस बहस और मुदद्े पर गौर और फिक्र करना पिता व पुत्र दोनों के भविष्य के लिये आवश्यक है। मुलायम सिंह के सभी शुभचिंतक चाहते हैं कि वह ऐतिहासिक पुरुष बनें, क्या वह सिर्फ सैफई को चमकाने से यादगार पुरुष बन सकते हैं। यह एक विचारणीय प्रश्न हैं। रहीम कह रहे हैं कि बड़े बड़ाई न करें, बड़े न बालें बोल, रहिमनहीरा कब कहे लाख टका मेरा मोल। जब हम क्रान्तिकारियों और बलिदानियों के साथ स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों के जीवन दर्शन पर नजर डालते हैं, तब उनके द्वारा किया गया त्याग और बलिदान अपने आप सबके सामने आ जाता है। यह भारत ही तो है, जहां पर नरम पंथियों व गरम पंथियों को समान रूप से देश को आजाद कराने के लिये देशवासियों ने समान रूप से सम्मान दिया है। जहां एक ओर देश शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, चन्द्रशेखर आजाद, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेन्द्र लाहड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, नेता जी सुभाषचन्द्र बोस जैसे आदि क्रान्तिकारियों को याद करती है वहीं अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के साथ मौलाना मुहम्मद अली जौहर, गणेश शंकर विद्यार्थी, पण्डित जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, मौलना अबुल कलाम आजाद की कुर्बानी को भी याद करती है। यह सारी विभूतियां अमर हो गयी हैं, जिनके त्याग, बलिदान व उनकी तपस्या को आज भी देश की जनता याद करती हैं। इसी प्रकार देश के असंख्य लोग बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर व डा0 राम मनोहर लोहिया को भी हर समय याद करते हैं। पूर्व प्रधानमन्त्री लालबहादुर शास्त्री, चैधरी चरण सिंह और बसपा संस्थापक मा0 कांशीराम को फानी दुनिया से कूच कर जाने के बाद भी याद किया जा रहा है। उसका मूल कारण है कि इन महान विभूतियों ने देश को कुछ न कुछ दिया जरूर है। अब मुलायम सिंह यादव आप अपनी राजनीति का मूल्यांकन करें कि आप व आपका परिवार सैफई रूपी लंका के मोह, माया के मकड़ जाल से बाहर ही नहीं निकल पा रहा है, जिससे इटावा जनपद की दुर्दशा हो रही है। सब जानते हैं कि न तो इटावा जनपद में कोई मिल है या न कोई फैक्ट्री या कारखाना? भला मुलायम सिंह जी इटावा जनपदवासी आपको व आपकी पार्टी को क्यों याद रखेंगे। यह अहम सवाल आपके सामने मुंह वायें खड़ा है। सैफई महोत्सव तो एक उदाहरण है जिसने इटावा प्रदर्शनी के सिर्फ प्राण ही नहीं निकाले बल्कि उसकी आत्मा तक को कुचला है। काश! मुलायम सिंह यादव इस ज्वलंत सवाल का हल खोजें, जिससे उनकी अपनी मान मर्यादा चोटिल हो रही है। उन्हें यादगार पुरुष बनने के लिये इटावा के लिये कुछ न कुछ जरूर करना चाहिये, क्योंकि अभी उनके पुत्र अखिलेश यादव के शासनकाल के सवा साल बाकी हैं।

Report :- Desk
Posted Date :- 29-12-2015
आपकी बात
Video Gallery
Photo Gallery

Portal Owned, Maintained and Updated by : Etawah Live Team || Designed, Developed and Hosted by : http://portals.news/