दोस्त की प्रेरणा ने उदित को बना दिया भारतीय टीम का कप्तान

भरथना (रिपोर्ट- तनुज श्रीवास्तव)- एक साधारण से युवक को उसके दोस्त की प्रेरणा ने विश्व के ऐसे शिखर पर पहुँचा दिया, जहाँ उसे पूरा देश भारतीय कप्तान के रूप में पहचानने लगा। कच्ची उम्र में दोस्ती का वादा निभाकर उसके द्वारा थमायी गई हैंडबाॅल से ऐसा जुनून सवार हुआ कि अण्डर-19 भारतीय हैंडबाॅल की टीम की बतौर कप्तानी संभालने तक का सफर तय कर जनपद को गौरवान्वित कर डाला और अपना नाम इतिहास के पन्नों में सदैव-सदैव के लिए स्वर्णिम अक्षरों से अंकित करा दिया।
जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं जनपद के ऐसे प्रतिभाशाली लाल की, जिसने अपनी कला कौशल के चलते सम्पूर्ण विश्व में जनपद इटावा का विजय पताका फहरा दिया। वह शहर व जनपद इटावा के कचैरा रोड स्थित दुर्गा कालोनी में रहने वाले साधारण कृषक राजीव पाठक व माँ अर्चना पाठक के करीब 19 वर्षीय पुत्र उदित पाठक हैं। जिन्होंने उज्बेकिस्तान में आयोजित अण्डर-19 भारतीय हैंडबाॅल की टीम का बतौर भारतीय कप्तान के रूप में प्रतिनिधित्व किया। उज्बेकिस्तान में हाल ही में सम्पन्न हुई अन्तर्राष्ट्रीय हैंडबाॅल प्रतियोगिता में भारतीय टीम की कप्तानी करके अपने घर पहुँचे भारतीय टीम के कप्तान उदित पाठक ने अपने एक साधारण बच्चे के जीवन से भारतीय टीम की कप्तानी तक के सफर के बारे में बताया कि उन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलने का ज्यादा शौक था। कक्षा- 8 में अध्ययनरत रहने पर एक बार वह खेल रहे थे। तभी उनके अजीज मित्र अवनीश ने उन्हें हैंडबाॅल खेलने की सलाह दी और उनके हाथों में हैंडबाॅल थमा दी। दोस्त द्वारा खेल में ज्यादा रूझान रखने की बात उस समय कुछ अजीब लगी, लेकिन यारी का वादा निभाने का असर यह हुआ कि पहले ही ट्रायल में अमेठी हाॅस्टल के लिए उनका चयन हो गया। वहीं वर्ष 2016 में झारखण्ड में आयोजित नेशनल चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया तथा 2017 में स्कूल चैम्पियनशिप खेली। बीती जुलाई 2018 में भारतीय अण्डर-19 सब जूनियर टीम में बतौर भारतीय कप्तान के रूप में उनका चयन हुआ था। भारतीय कप्तान श्री पाठक ने बताया कि वह वर्तमान में अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद में स्नातक द्वितीय वर्ष की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। साथ ही वह आगामी वर्ष 2020 में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी भी कर रहे हैं। इससे पहले वह लन्दन में आयोजित काॅपर बाॅक्स हैंडबाॅल टूर्नामेण्ट में भी टीम का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरूजनों के साथ-साथ सबसे ज्यादा उनके अजीज मित्र को जाता है, जिन्होंने इस ओर उन्हें पे्ररित किया।
वहीं उदित के पिता कृषक राजीव पाठक ने बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता से गदगद होकर बताया कि उदित बचपन से ही पढाई से ज्यादा खेलों में रूचि रखता था। कई बार पढाई को लेकर डांट- फटकार व पिटाई भी की जाती थी, किन्तु उसका रूझान खेलों से कम नहीं हुआ। खेल में अधिक दिलचस्पी होने से पहले वह भी बेटे के भविष्य को लेकर चिन्तित रहते थे, किन्तु समय बीतता गया और आज बेटे की इस कडी मेहनत के उपरान्त ऐतिहासिक सफलता पर उनका सिर गर्व से ऊँचा उठ गया। पिछले तीन माह में दो बार विदेश की धरती पर पैर रखने के बाद उनके बेटे ने भारतीय सब जूनियर हैंडबाॅल टीम का बतौर भारतीय कप्तान के रूप में प्रतिनिधित्व किया, यह उनके लिए बहुत ही गौरवान्वित होने वाला पल है।

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