सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार 26 अगस्त को – महेश चन्द्र तिवारी

इटावा । संस्कृत दिवस के उपलक्ष में संस्कृत समिति द्वारा श्रावणी पूर्णिमा पर 26 अगस्त रविवार को प्रातः 7 बजे उत्तर वाहिनी यमुना तट पर घूतपापेश्वर मंदिरम् के पास सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार होगा।
संस्कृत समिति के अध्यक्ष पूर्व प्राचार्य महेश चन्द्र तिवारी ने बताया कि त्रिवर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य द्विजाति कहे जाते हैं उनका यह आत्मपरिमार्जन स्वरूप श्रावणी उपाकर्म संस्कार आचार्य राजेन्द्र दुबे (बनकटी) सम्पन्न करायेंगे।
संस्कृत समिति के सचिव व्यााकरणाचार्य देवेश शास्त्री ने बताया कि आत्म परिशोधन प्रक्रिया स्वरूप श्रावणी उपाकर्म संस्कार में प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प। गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र तथा पवित्र कुशा से स्नानकर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं। स्नान के बाद ऋषिपूजन, सूर्योपस्थान एवं यज्ञोपवीत पूजन व हवन करते हैं । इस संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है।
संस्कृत समिति के पदाधिकारियों ने संयोजक प्रदीपानन्द महाराज व आचार्य आनन्द मोहन दुबे के साथ शनिवार का यमुना के प्रवाह का जयजा लिया और संयोजक प्रदीपानन्द महाराज ने बताया कि नदी के तेज प्रवाह व कटान की बजह से मंदिर परिसर में नवनिर्मित कुण्ड में पवित्र यमुना जल संचित कर सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार हो सकेगा।
संस्कृत समिति ने प्रशासन से उत्तर वाहिनी यमुना पर पक्का घाट बनाये जाने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह के आयोजनों में सुगमता रहे।

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