Category: हमारा इटावा

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लंका नरेश रावण व महर्षि वशि‍ष्ठी कर चुके हैं तपस्या

वैदिक काल में इष्टिकापुरी ही आधुनिक काल में इटावा नगरी है। अध्‍यात्‍म की अलौकिक और अद्वितीय  मायानगरी के रूप में विख्‍यात रही है इष्टिकापुरी । देवों, ऋषियों-मुनियों  को मनवांछित फल

इष्टिन‍कापुरी का बदला हुआ नाम है इटावा

कति‍पय वि‍द्वानों  के मतानुसार आगरा जि‍ला के बटेश्‍वर  से लेकर  भरेह तक के मार्ग को इष्‍टपथ  के नाम से जाना जाता है। इष्‍टि‍कापुरी के नामकरण के पीछे इस सम्‍पूर्ण मार्ग

लूटे गये धन से खड़ा किया था संगठन

ब्रहमचारी  डकैत उस समय ग्‍वालियर  राज्‍य  में डाका  डालता था तथा  डकेंती डालने  के पश्‍चात यमुना चम्‍बल  के बीहडों मे आकर शरण लता था। ब्रहमचारी  डकैत द्वारा लूटे गये धन

ब्रहमचारी नामक कुखात डकैत भी हुआ था क्रांति‍कारी संगठन में शामि‍ल

मातृवेदी  संगठन का उस समय क्रांतिकारी  नारा तैयार किया गया जिसका  जन  जागरण जल्‍द ही तैयार किया  गया  साथ-साथ बच्‍चों  की जुबान  पर उद्घोष करने  लगा ‘’ भाइयों आगे बढो,

शि‍क्षक के नेतृत्व में बना था डाकुओं का क्रांति‍कारी संगठन

पं0 गेदांलाल  ने इस बार क्रांतिकारी संगठन  के अपराध प्रवृत्ति से जुडे  लोगों  का हृदय  परिवर्तन  कर स्‍वाधीनता आन्‍दोलन  में  सक्रिय भागीदारी  की प्रेरित  किया। इटावा व  सीमावर्ती इलाकों  में

शि‍वाजी पार्टी ने चलाया था जनजागरण अभि‍यान

बर्ष 1914 में जब यूरोप द्वारा भयंकर विश्‍व  व्‍यापी  युद्ध की तैयारी  की जा रही थी  तव देश  में ब्रिटिश शासन को सशस्‍त्र विद्रोह से समाप्‍त  करने के लिये क्रांतिकारियों 

मुगलिया शासन से पीड़ि‍तों ने ली थी ‘चम्बल घाटी’ में शरण

दस्‍यु  गतिविधि‍यों  के लिये विख्‍यात चंम्‍बल  घाटी सिर्फ  डकैतों की शरणस्‍थली  ही नहीं रही  बल्कि  मुगल  काल के दौरान भी मुगलिया शासन  से पीडित  लोगों  ने यहां  पनाह ली थी।

देश प्रेमी भी रहे है डकैत आजादी की लडाई में ले चुके हैं भाग

चम्‍बल घाटी के डाकुओं की पहचान आज भले ही आतंक के पर्याय के रूप में हो लेकिन यह बहुत  ही कम लोग जानते होगे कि स्वतंत्रता  आन्‍दोलन के दौरान डाकुओं 

राष्ट्रिय/राज्य पुरस्कार पाने वाले अध्यापक /अध्यापिकाओं की सूची बेसिक शिक्षा परिषद, इटावा (उ0प्र0)

क्र0स0 नाम अध्‍यापक/अध्‍यापिका पद पुरस्‍कार प्राप्‍त विघालय  का नाम क्षेत्र    राष्‍ट्र राज्‍य 1 श्री ओउम प्रकाश प्र0अ0 प्रा0वि0नगला सलहदी जसवन्‍तनगर 1975   2 श्रीमती शिवदेवी प्र0अ0 उच्‍च प्रा0वि0 भरथना भरथना

1942 के भारत छोड़ो आन्दोालन को आगे बढ़ने में शहीद हुए इटावा के लोग

क्रं0सं0 नाम पि‍ता का नाम पता 1 कल्‍यान सि‍हं गनेश प्रसाद मोहल्‍ला गुमटी, औरैया, इटाव 2 दर्शन लाल ——- पि‍परपुर, औरैया, इटावा 3 वब्‍रूराम शि‍वदीन परसुति‍या पटीन दरवाजा, औरैया इटावा

सन् 1931 के सवि‍नय अवज्ञा आन्दोलन में इटावा के शहीद।

क्र0सं0 नाम पि‍ता का नाम पता 1 बलवंत सि‍हं                बलदेव प्रसाद नगारि‍या मौजा बेलाहरा, थाना भर्थना इटावा 2 भूपाल सि‍हं वि‍शुनाई काछी पुर, मझावॉ, थाना उसराहार, इटावा 3 शंकर सि‍हं

आजाद हिन्द् फौज के शहीद हुये इटावा के स्वतत्रता संग्राम सेनानी

स्‍व0 काली चरन पुत्र स्व0  छोटे लाल निवासी ग्राम-भदामई पोस्‍ट – बसरेहर( इटावा ) मृत्‍यq& वि‍वरण उपलब्‍ध नहीं स्‍व0 रघुनाथ सिंह पुत्र स्‍व0  बच्‍चीलाल   निवासी ग्राम व पोस्‍ट मुसावली (

इटावा के स्वततंत्रता संग्राम सेनानी वर्ष 1921 से 1942 तक

क्र0सं0 सेनानी का नाम पिता का नाम   पता    जुर्माना तथा कब हुई सजा 1 अकबरखां मिढईयां भटौली-विधूना 1931 में 8 माह की सजा 2 अंगनूलाल रेवती फतहपुर-बेला 1930 में 6

१५ वीं शताव्दी में इटावा

इस शताव्दी में जोनपुर के शासको ओर दिल्ली सिहासन के विभिन्न अभिलाषियो के बीच बराबर संघर्ष होते रहे इटावा जिलो दोनों राज्यों की सीमा पर था अतः दोनों के आक्रमण

इटावा में मुस्लिम प्रभाव

मैनपुरी, फरुखाबाद,आगरा तथा एटा वगैरह पडौस के सभी जिलो ने मुस्लिम विजेताओं की पूर्ण आधीनता स्वीकार की ओर उन्हें रहने के लिए स्थान दिया इसी करण उन जिलो में अनेक

१३ वीं और १४ वीं शताव्दी में इटावा

सन् ११९४ ई० में दिल्ली और कन्नौज के हिंदू राज्यों के पतन हो जाने के बाद यह जिला दिल्ली की मुस्लिम शक्तियों के अधीन हुआ और सन् १८०१ ई० तक

११ वीं ई० १२ वीं शताव्दी में इटावा

१०१८ ई० तक कन्नोज के राठौर वंशी राजा इटावा पर शासन करते रहे थे उसी समय जब महमूद गजनी भारत के बारहवें आक्रमण मैं बरन (वतमान बुनान्द्शाहर) के राजा कुलचंद्र