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Ashish Bajpai

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बचपन में कछुआ और खरगोश की कहानी पढी थी आज तक समझ नहीं आया की कछुए में इतना कॉन्फिडेंस आया कहा से, खैर मेरी ईमेल etawah.news@gmail.com पर आप ख़बरें व सुझाव भेज सकते अगर जरुरी लगे तो 9412182324, 7017070200 पर कॉल भी कर सकते है

चकरनगर तहसील में लगा कानूनी सहायता शिविर

चकरनगर (इटावा),  8 अगस्त । कानूनी सहायता शिविर तहसील सभागार चकरनगर में नवागंतुक तहसीलदार नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान जिला स्तर से आए शासकीय

एक जनपद एक उत्पाद में चयनित लाभार्थियो को मिले ऋण वितरण के प्रमाण पत्र

इटावा10 अगस्त 18- गरीब और अमीर का कोई मानक नहीं होता है यदि गरीब व्यक्ति मेहनत ,परिश्रम कर आगे बढ़ने का प्रयास किया जाये तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी

पिता ने लगाया पुत्र को अगवा करने का आरोप, एसएसपी से की कार्यवाही की मांग, पुलिस ने मामला बताया संदेहजनक

सैफई ( इटावा) थाना सैफई क्षेत्र के ग्राम उझियानी निवासी करण सिंह राठौर ने अपने पुत्र विवेक के अपहरणकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही की मांग एसएसपी इटावा से की है उझियानी निवासी

देवरिया घटना के विरोध में सपा महिला सभा ने निकाला केंडल मार्च

इटावा। देवरिया  के बालिका संरक्षण गृह कांड के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार की शाम नगर पालिका से शास्त्री चौराहे तक कैंडिल मार्च निकाला। प्रदेश सरकार के खिलाफ

अर्जुन सिंह भदौरि‍या ने कि‍या ‘लाल सेना’ का गठन

जि‍ले में अर्जुन सि‍हं भदौरि‍या ने गांवों के लोगों  को संगठि‍त कर सशस्‍त्र लाल सेना बनाकर क्रान्‍ि‍त के लि‍ये  पूर्ण  तैयारी कर ली थी। इन आन्‍दोलन को देखकर  लोगों  को

झण्डा लगाने की कोशि‍श में पुलि‍सि‍या गोली के शि‍कार बने छह लोग

भर्थना के वि‍द्यार्थियों ने जुलूस नि‍काला। मवेशीखाने के मवेशियों  को मुक्‍त्‍ा कर दि‍या और  तहसील पर राष्‍ट्रीय झण्‍डा लगा दि‍या तथा रेल के तार काट दि‍ये गये। उसी तारीख को

करूणाजनक घटना रही ‘नगला ढकाऊ’ का गोली कांड

इस आन्‍दोलन की चि‍र स्‍मरणीय, कि‍न्‍तु करूणाजनक घटना थी ‘नगला ढकाऊ’ का गोलीकांड। जि‍समें तीन व्‍यक्‍ि‍त पुलि‍स को गोली के शि‍कार हुए।यह गोलीकांड 10 मार्च 1931 को हुआ, जि‍समें   बलवंत

जब नेहरू और गांधी आंदोलन को गति‍ देने इटावा आये

इटावा  और  मुख्‍य कस्‍वों  मे पूरी हड़ताल  रही।  पुलि‍स  ने  जुलूसों  पर डण्‍डे  बरसाये। इसी समय पं0 जवाहर लाल नेहरू  ने इटावा  आकर  आन्‍दोलन को गति‍ दी।  नवम्‍बर सन् 1928 

काकोरी कांड में गि‍रफतार हुये ज्योति‍ शंकर दीक्षि‍त और मुकुन्दी लाल

क्रान्‍ि‍तकारि‍यों  ने अपना कार्यक्रम शुरू कर दि‍या और  राजनैति‍क डकैति‍यों  का सि‍लसि‍ला जारी हुआ । 9 अगस्‍त सन्  1925  को काकोरी  कांड के रूप में एक डकैती  हुई,  जि‍समें इटावा 

महि‍ला के वेश में जब डर कर भागा अंग्रेज कलेक्टर

इस बीच  इटावा  के सैनि‍कों ने ह्यूम और  उनके परि‍वार  को मार डालने   की योजना बनाई।  योजना की भनक अंग्रेजों को लग गयी।  इस समय इटावा के नि‍कट स्‍ि‍थत बढ़पुरा 

जब अंग्रेजों ने इटावा छोड़ने का फरमान दि‍या

इस बीच ह्यूम  ने एक और दूरदर्शी कार्य कि‍या था। उन्‍होंने  इटावा में  स्‍ि‍थत खजाने का एक बड़ा भाग आगरा भेज दि‍या था तथा शेष  भाग इटावा  के ही अंग्रेजों

बलैया मंदि‍र के नि‍कट हुई वि‍द्रोहि‍यो व पुलि‍स के मध्य मुठभेड़

19 मई 1857 ई0 को इटावा, आगरा रोड पर जसवन्‍तनगर  के बलैया मंदि‍र पर नि‍कट बाहर से आ रहे कुछ सशस्‍त्र वि‍द्रोहि‍यों और गश्‍ती  पुलि‍स के मध्‍य मुठभेड़ हुई। वि‍द्रोहि‍यों

1857 के मेरठ वि‍द्रोह की आग दो दि‍न बाद इटावा पहुंची

10मई 1857 ई0 को मेरठ छावनी  मे फूटी  वि‍द्रोह  की आग दो दि‍न बाद ही यानी 12 मई को इटावा तक आ पहुंची। उस समय जि‍ले में 9 नम्‍बर देशी

जब क्रांतिकरि‍यों का दमन करने की जि‍म्मेदारी मि‍ली कलेक्टर हयूम को

दरअसल भौगोलि‍क दृष्‍टि‍ ये यह जि‍ला क्रांति‍कारि‍यों के लि‍ये बड़ा ही  उपयुक्‍त साबि‍त हुआ था। क्‍योंकि‍ यहां यमुना – चंवल के घने  बीहड़ों  में शरण लेकर अंग्रेजों  के वि‍रूद्ध युद्ध

स्वाधीनता संग्राम में इटावा का योगदान

सन् 1857ई0 में वि‍द्रोह की ज्‍वाला बनकर फूट पड़े प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम के दौरान इटावा जि‍ला क्रान्‍ति‍कारि‍यों का प्रमुख रणक्षेत्र रहा। यहां लगभग डेढ़ वर्ष तक अंग्रेजी फौजी और क्रांन्‍ि‍तकारि‍यों 

इटावा पर हुआ लड़ाकू जाति‍ का अधि‍कार

1761 ई0 में पानीपत के युद्ध में मराठे  अहमदशाह अब्‍दाली से हार गये । अब्‍दाली  ने भारत से जाते समय अपने बहुत  से प्रदेश रूहेलों  में दे दि‍ये। इटावा को 

जयपुर के राजा जयसि‍ह के अधि‍कार में भी रहा इटावा

दि‍ल्‍ली में मुगल साम्राज्‍य के पतनोन्‍मुखी काल में इटावा फर्रूखाबाद  के नबाव के अधि‍कार में आ गया। कुछ समय के लि‍ये  इटावा  जयपुर के राजा जयसि‍हं के अधि‍कार  में भी

आगरा सूबे में चला गया इटावा का कुछ भाग

शेरशाह तथा सूर शासन के पश्‍चात 1556 ई0 से अकबर का राज्‍य स्‍थापि‍त हो गया। अकबर के काल में इटावा का कुछ भाग आगरा सूबे में चला गया। यहां पर

बाबर ने इटावा पर भी कि‍या था अधि‍कार

1528 ई0 में कालपी-कन्‍नौज के साथ ही बाबर ने इटावा पर भी अधि‍कार  कर लि‍या। इटावा की जागीर हुमायूं ने  उजबेग सुल्‍तान हुसैन को दे दी । बाबर की मृत्‍यु

इटावा कि‍ले पर हुआ लोदि‍या का अधि‍कार, इब्राहि‍म लोहानी बने गवर्नर

1487 ई0 में जौनपुर तथा दि‍ल्‍ली  के लोदी वंश के बीच पुन:संधि‍  टूट गई। इटावा में बहलोल लोदी  तथा जौनपुर की  ओर से हुसैन शाह के भाई  इब्राहीम खां तथा